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चाय
आओ बैठें साथ-साथ
और चाय पियें,
बस इतना ध्यान रखना
कप ऊपर तक मत भर देना,
कप में थोड़ी-सी चाय रहे
थोड़ी जगह खाली रहे
खाली जगह थोड़ी –सी मेरी
खाली जगह थोड़ी तुम्हारी
ताकि तुम तुम रह सको,
मैं मैं रह सकूँ,
थोड़ी-सी चाहत बाकी रहे
एक और कप चाय की
और तुम्हारे साथ की!
- नूपुर अशोक

काव्यालय को प्राप्त: 2 Feb 2022. काव्यालय पर प्रकाशित: 18 Feb 2022

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 चाय
इस महीने :
'मेरा अपना चाँद'
सुशोभित


चीड़ में अटका चाँद
बूँद बूँद टपका रहता है
औंधा लटका चाँद।

दुनियाभर में इसके डेरे
पखवाड़े पखवाड़े फेरे
अबकी घर मेरे रुक जाए
रस्ता भटका चाँद।

सँझा से सँवलाई छाया
बरखा में बिसराई माया
देखो कितना दु:ख सहता है
मेरा अपना चाँद।

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..

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नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्वान फिर-फिर!

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धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भाँति घेरा,
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प्रकाश देवकुलिश


इससे पहले कि अँधेरा पोत दे काला रंग
सफेद रोशनी पर
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..

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समेट कर,
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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