काव्यालय क्विज़

वाणी मुरारका, नूपुर अशोक

कविताओं के संग एक खेल खेलें? यह है काव्यालय क्विज़! देखें आपके कितने उत्तर सही आते हैं।

घबराइएगा नहीं। यह स्कूल की परीक्षाओं जैसा नहीं है। हर प्रश्न में ही उत्तर छिपा है। ठीक से ढूँढेंगे तो आपको 10/10 मिल सकते हैं। हर प्रश्न इस उद्देश्य से बनाया गया है कि उसके ज़रिए आप कई अद्भुत कविताओं से मुलाकात कर सकें, उनमें डूब सकें।

प्रकाशित: 30 जनवरी 2026

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कविताओं के संग एक खेल खेलें?

यह है काव्यालय क्विज़! देखें आपके कितने उत्तर सही आते हैं।

इस महीने :

'नदी के द्वीप'
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'


हम नदी के द्वीप हैं।
हम नहीं कहते कि हमको छोड़कर स्रोतस्विनी बह जाए।
वह हमें आकार देती है।
हमारे कोण, गलियाँ, अंतरीप, उभार, सैकत-कूल
सब गोलाइयाँ उसकी गढ़ी हैं।

माँ है वह! है, इसी से हम बने हैं।
किंतु हम हैं द्वीप। हम धारा नहीं हैं।
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने :

'कल'
रणजीत मुरारका


कल कहाँ किसने
कहा देखा सुना है
फिर भी मैं कल के लिए
जीता रहा हूँ।

आज को भूले
शंका सोच भय
से काँपता
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
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