काव्यालय क्विज़

वाणी मुरारका, नूपुर अशोक

कविताओं के संग एक खेल खेलें? यह है काव्यालय क्विज़! देखें आपके कितने उत्तर सही आते हैं।

घबराइएगा नहीं। यह स्कूल की परीक्षाओं जैसा नहीं है। हर प्रश्न में ही उत्तर छिपा है। ठीक से ढूँढेंगे तो आपको 10/10 मिल सकते हैं। हर प्रश्न इस उद्देश्य से बनाया गया है कि उसके ज़रिए आप कई अद्भुत कविताओं से मुलाकात कर सकें, उनमें डूब सकें।

प्रकाशित: 30 जनवरी 2026

विषय:
विविध (12)
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इस महीने :
'मौन के शब्द'
ऋतु शर्मा नन्नन पाँडे


छोटे-छोटे जूते लाइन में रखे थे,
मासूम आँखों में डर चिपका था,
नाम, धर्म, उम्र — सब मिटा दिए गए,
सिर्फ़ एक चिन्ह — स्टार ऑफ़ डेविड बाकी था।

बिना शोर के ट्रेनें चली थीं,
सपनों को डिब्बों में बंद कर,
हर स्टेशन पर कोई माँ रोई थी,
और बच्चों ने

ईंटों की दीवा ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'ठहराव'
राहुल सिंह 'राहु'


आओ हम न सोचें कुछ,
न खोजें कुछ,
बस यूँ ही देखें सब कुछ,
इत्मीनान से...
जियें इस पल के गुमान से,
जो रोक रहा हमें,
कौन सा यह भ्रम है?
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें होमेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।

देखिए शिव बहादुर सिंह भदौरिया की कविता "नदी का बहना मुझमें हो" पर विशेष प्रस्तुति
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