Panth Hone Do Aparichit
panth hone do aparichit
praaN rahane do akelaa!

aur honge charaN haare,                 
any hain jo lauTate de shool ko sankalp saare;
dukhavratee nirmaaN-unmad
yah amarataa naapate pad;
baa(n)dh denge ank-sansRti se timir men svarN belaa!

doosaree hogee kahaanee                 
shoony men jisake miTe svar, dhooli men khoee nishaanee;
aaj jisapar pralay vismit,
main lagaatee chal rahee nit,
motiyon kee haaT au, chinagaariyon kaa ek melaa!

haas kaa madhu-doot bhejo,                 
roSh kee bhroobhangimaa patajhaar ko chaahe sahejo;
le milegaa ur achanchal
vedanaa-jal svapn-shatadal,
jaan lo, vah milan-ekaakee virah men hai dukelaa!
- Mahadevi Verma
Recited by: Sharad Tewary
सम्पादकीय: पहले "आज जिसपर प्रलय विस्मित" ग़लती से "आज जिसपर प्यार विस्मित" लिखा था। वही ग़लती ऑडियो में रह गई है। पंक्ति महादेवी वर्मा की आत्मिका देख कर सुधारी गई है।

***
Mahadevi Verma
's other poems on Kaavyaalaya

 Kaun Tum Mere Hriday Mein
 Jo Tum Aa Jaate Ek Baar
 Tum Mujhme Priya! Phir Parichay Kyaa!
 Panth Hone Do Aparichit
 Priya Chirantan Hai Sajani
 Mere Deepak
This Month

'भावुकता और पवित्रता'
रवीन्द्रनाथ ठाकुर


भाव-रस के लिए हमारे हृदय में एक स्वाभाविक लोभ होता है। काव्य और शिल्पकला से, गल्प, गान और अभिनय से, भाव-रस का उपभोग करने का आयोजन हम करते रहते हैं।

प्राय: उपासना से भी हम भाव-तृप्ति चाहते हैं। कुछ क्षणों के लिए एक विशेष रस का आभोग करके हम यह सोचते हैं कि हमें कुछ लाभ हुआ। धीरे-धीरे इस भोग की आदत एक नशा बन जाती है। मनुष्य अन्यान्य रस-लाभ के लिए जिस तरह विविध प्रकार के आयोजन करता है, लोगों को नियुक्त करता है, रुपया खर्च करता है उसी तरह उपासना-रस के नशे के लिए भी वह तरह-तरह के आयोजन करता है। रसोद्रेक के लिए उचित लोगों का संग्रह करके उचित रूप से वक्तृताओं की व्यवस्था की जाती है। भगवत्प्रेम का रस नियमित रूप से मिलता रहे, इस विचार से तरह-तरह की दुकानें खोली जाती है। ..

Read and listen here...
Next post on
Friday 26th April

To receive an email notification
Subscribe
random post | poem sections: shilaadhaar yugavaaNee nav-kusum kaavya-setu | pratidhwani | kaavya-lekh
submission | contact us | about us

a  MANASKRITI  website