जल कर दे
ईश्वर मुझको जल कर दे
सीमित कर सागर कर दे

मोड़े तू जिस ओर मुझे
चल दूँ दे जी-जान तुझे

चट्टानों से ढल कर के
निर्मल निर्झर सा कर दे

बहती जाऊं तेरी ओर
हर को लेकर अपनी ओर

पीड़ा मेरी हर कर के
वाणी मेरी सुन कर के

मंज़िल मेरी तय कर दे
ईश्वर मुझको जल कर दे
- वाणी मुरारका
Vani Murarka
[email protected]

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वाणी मुरारका
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'चिकने लम्बे केश'
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चिकने लम्बे केश
काली चमकीली आँखें
खिलते हुए फूल के जैसा रंग शरीर का
फूलों ही जैसी सुगन्ध शरीर की
समयों के अन्तराल चीरती हूई
अधीरता इच्छा की
..

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'जबड़े जीभ और दाँत'
भवानीप्रसाद मिश्र


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तुम उतने नच नहीं रहे हो

..

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कुछ नहीं हिला उस दिन
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ताकते हूए अस्पताल के परदे
और दरवाजे और खिड़कीयाँ
और आती-जाती लड़कियाँ
जिन्हे मैं सिस्टर नहीं कहना चाहता था
..

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शुक्रवार 24 मई को

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