अप्रतिम कविताएँ पाने
अगर सुनो तो
तारे जड़े हैं ज़िन्दगी में
अंधियारे बिछे हैं ज़िन्दगी में

और साँसों की लहर
सहला जाती है …

अगर सुनो तो


stars are studded
in our life
darkness laid out
in our life

and the gentle flow
of breath,
ever soothing…

if you hear it

- वाणी मुरारका
Vani Murarka
[email protected]

काव्यालय को प्राप्त: 30 Jun 2017. काव्यालय पर प्रकाशित: 23 Apr 2021

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इस महीने :
'हर मकान बूढ़ा होता'
कुमार रवीन्द्र


साधो, सच है
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धीरे-धीरे हर मकान भी बूढ़ा होता

देह घरों की थक जाती है
बस जाता भीतर अँधियारा
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वह भी हो जाता है खारा

घर में
जो देवा बसता है
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'अधूरी'
प्रिया एन. अइयर


हर घर में दबी आवाज़ होती है
एक अनसुनी सी
रात में खनखती चूड़ियों की
इक सिसकी सी
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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