अधूरी साधना
प्रियतम मेरे,
सब भिन्न भिन्न बुनते हैं
गुलदस्तों को,
भावनाओं से,
विचारों से।
मैं तुम्हे बुनूँ
अपनी साँसों से।
भावनायें स्थिर हो जाएँ,
विचारधारा भी,
होंठ भी मौन रहे -
और हर श्वास
नित तुम्हारा नाम कहे -
और तुम बुनते रहो।

एक घड़ी आएगी फिर
मेरी बंद पलकों के सम्मुख
तुम निराकार साकार होगे।
तुम बाहों में अपनी,
मेरी साँसों को समेट लोगे।
फिर न होगा मिलना,
न बिछड़ना, न जन्म-मरण,
न मैं।
सिर्फ तुम मेरे प्रियतम -
अपना स्वरूप पाकर -
अनंत।
- वाणी मुरारका
Vani Murarka
[email protected]

***
वाणी मुरारका
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 अगर सुनो तो
 अधूरी साधना
 गहरा आँगन
 चुप सी लगी है
 जल कर दे
 देश की नागरिक
 शहर की दीवाली पर अमावस का आह्वान
हम खड़े हो जाएँ अपनी बेड़ियों को तोड़ कर।
रोशनी की ओर चल दें तीरगी को छोड़ कर।
ख़त्म जब हो जाएंगी माज़ी की सब रुस्वाइयाँ,
खुद-बख़ुद मुड़ जाएगा यह वक़्त अगले मोड़ पर।

~ विनोद तिवारी

संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" में कविताओं के बीच बीच कई मुक्तक भी हैं, जैसे कि यह

इस महीने :
'अगर सुनो तो'
वाणी मुरारका


तारे जड़े हैं ज़िन्दगी में
अंधियारे बिछे हैं ज़िन्दगी में

और साँसों की लहर
सहला जाती है …

अगर सुनो तो

..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'किसके संग गाए थे'
मिलाप दूगड़


रात यदि श्याम नहीं आए थे
मैंने इतने गीत सुहाने किसके संग गाए थे?

गूँज रहा अब भी वंशी स्वर,
मुख-सम्मुख उड़ता पीताम्बर।
किसने फिर ये रास मनोहर
वन में रचवाये थे?

शंका क्यों रहने दें मन में
चल कर सखि देखें मधुवन में
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय

a  MANASKRITI  website