पावन कर दो
कवि! मेरा मन पावन कर दो!

हे! रसधार
बहाने वाले,
हे! आनन्द
लुटाने वाले,

ज्योतिपुंज मैं भी हो जाऊँ
ऐसा अपना तेज प्रखर दो!
(ऋग्वेद - मंत्र ९/५०/४ से अनुप्रेरित)
- अमृत खरे
पुस्तक "मयूरपंख: गीत संग्रह (अमृत खरे)" से

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अमृत खरे
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 अभिसार गा रहा हूँ
 पावन कर दो
इस महीने
'एक फूल की चाह'
सियाराम शरण गुप्त


बेटी, जाता हूँ मन्दिर में
आज्ञा यही समझ तेरी।
उसने नहीं कहा कुछ, मैं ही
बोल उठा तब धीरज धर -
तुझको देवी के प्रसाद का
एक फूल तो दूँ लाकर! ..

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शुक्रवार 26 अक्टूबर को

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