मंगलम्
भूमि मंगलम् (भूमि मंगलम्)
उदक मंगलम् (उदक मंगलम्)
अग्नि मंगलम् (अग्नि मंगलम्)
वायु मंगलम् (वायु मंगलम्)
गगन मंगलम् (गगन मंगलम्)
सूर्य मंगलम् (सूर्य मंगलम्)
चन्द्र मंगलम् (चन्द्र मंगलम्)
जगत मंगलम् (जगत मंगलम्)
जीव मंगलम् (जीव मंगलम्)
देह मंगलम् (देह मंगलम्)
मनो मंगलम् (मनो मंगलम्)
आत्म मंगलम् (आत्म मंगलम्)
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु।

- अज्ञात
उदक : पानी; भवतु : ऐसा हो
सितार वादक पंडित रवि शंकर के एल्बम Chants of India से

27th Dec 2019 को प्रकाशित

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इस महीने :
'किसके संग गाए थे'
मिलाप दूगड़


रात यदि श्याम नहीं आए थे
मैंने इतने गीत सुहाने किसके संग गाए थे?

गूँज रहा अब भी वंशी स्वर,
मुख-सम्मुख उड़ता पीताम्बर।
किसने फिर ये रास मनोहर
वन में रचवाये थे?

शंका क्यों रहने दें मन में
चल कर सखि देखें मधुवन में
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
वो खुशी जो कहीं नहीं हासिल।
जो मुअस्सर* नहीं ज़माने में।
ख़्वाबगाहों* से चल के आएगी
ख़ुदबख़ुद तेरे आशियाने में।

~ विनोद तिवारी

*मुअस्सर: प्राप्त करने योग्य; ख्वाबगाहों - सपनों की जगह;

संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" में कविताओं के बीच बीच कई मुक्तक भी हैं, जैसे कि यह

तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
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