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मंगलम्
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मनो मंगलम् (मनो मंगलम्)
आत्म मंगलम् (आत्म मंगलम्)
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु।

- अज्ञात
उदक : पानी; भवतु : ऐसा हो
सितार वादक पंडित रवि शंकर के एल्बम Chants of India से

27th Dec 2019 को प्रकाशित

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अज्ञात
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 नया वर्ष
 मंगलम्
इस महीने :
'बसंत और पतझड़ '
मेरी ऑलिवर


मैं तेज़ी से भागी स्कूल के बाहर
बगीचे से होते हुए, जंगल तक
बिताया पूरा बसंत, अब तक का सीखा भूलने में

दो दूनी चार और मेहनत और बाकी सब
बनना विनम्र और उपयोगी, होना सफल और बाकी सब
मशीन और तेल, प्लास्टिक और पैसे और बाकी सब
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'भीतर शिखरों पर रहना है'
अनिता निहलानी


ख़्वाब देखकर सच करना है
ऊपर ही ऊपर चढ़ना है,
जीवन वृहत्त कैनवास है
सुंदर सहज रंग भरना है!

साथ चल रहा कोई निशदिन
हो अर्पित उसको कहना है,
इक विराट कुटुंब है दुनिया
सबसे मिलजुल कर रहना है!
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'भीतर बहुत दूर'
अनीता वर्मा


भीतर बहुत दूर
एक घेरा है
दुनिया के उपजे रास्तों का भूरा विस्तार
आँखों के जलकुंडों के किनारे
तुम्हारे अनगिनत प्रतिरूप
निर्वसन उनसे लिपटती हुई मेरी आत्मा

भीतर बहुत दूर
इस दुनिया के पीछे से
झाँकती है एक दुनिया
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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