मंगलम्
भूमि मंगलम् (भूमि मंगलम्)
उदक मंगलम् (उदक मंगलम्)
अग्नि मंगलम् (अग्नि मंगलम्)
वायु मंगलम् (वायु मंगलम्)
गगन मंगलम् (गगन मंगलम्)
सूर्य मंगलम् (सूर्य मंगलम्)
चन्द्र मंगलम् (चन्द्र मंगलम्)
जगत मंगलम् (जगत मंगलम्)
जीव मंगलम् (जीव मंगलम्)
देह मंगलम् (देह मंगलम्)
मनो मंगलम् (मनो मंगलम्)
आत्म मंगलम् (आत्म मंगलम्)
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु।

- अज्ञात
उदक : पानी; भवतु : ऐसा हो
सितार वादक पंडित रवि शंकर के एल्बम Chants of India से

27th Dec 2019 को प्रकाशित

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इस महीने :
'चल पथिक तू हौले से'
प्रिया एन. अइयर


टहल रहा गर भोर से पहले
पग तू रखना धीरे से
जगे हुए हैं जीव-जंतु
मानव तुमसे पहले से

खरगोश, कीट और खग निकले
नीड़, बिल, कुंड से खुल के
चंचल अबोध छौने संग
चली हिरन निर्भयता  से

..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
चलो समय के साथ चलेंगे,
परिवर्तन होगा धरती पर।
नया ज़माना पैदा होगा,
बूढ़ी दुनिया की अर्थी पर।

जो कुछ हम पर बीत चुकी है,
उस से मुक्त रहो, ओ नवयुग।
नए नए फूलों से महको,
मेरे मधुवन, जीयो जुग जुग।

~ विनोद तिवारी की कविता "मेरे मधुवन" का अंश संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" से

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