तोंद
कहते हैं सब लोग तोंद एक रोग बड़ा है
तोंद घटाएँ सभी चलन यह खूब चला है।
पर मानो यदि बात तोंद क्यों करनी कम है
सुख शान्ति सम्मान दायिनी तोंद में दम है।

औरों की क्या कहूं, मैं अपनी बात बताता
बचपन से ही रहा तोंद से सुखमय नाता।
जिससे भी की बात, अदब आँखों में पाया
नाम न लें गुरु, यार, मैं पंडित 'जी' कहलाया।

आज भी ऑफिस तक में तोंद से मान है मिलता
कितना भी हो बॉस शीर्ष, शुक्ला 'जी' कहता।
मान का यह कारक, धारक में गुरुता लाती
नाम में 'जी' जुड़ जाता, नजर ज्यों तोंद पे जाती।

मत सोचो कि घटी नहीं, अंगूर सो खट्टे
केवल नर में नहीं, चलन यह देवों तक में।
तोंद लिए बस एक देवता गणपति अपने
प्रथम हैं पूजे जाते, देव पड़े हैं कितने।

ताव मूंछ का समझो, तोंद जब तन लेती है
अड़ जाती है बीच, नहीं झुकने देती है।
राम नाम गुण धाम शान्ति सब पा जाता हूँ
भोजन के उपरान्त, तोंद जब सहलाता हूँ।

सम्मुख अपने जब भी पड़ती सुन्दर नारी
हाँ, कुछ बाधक तब हो जाती तोंद हमारी।
नजर तोंद पर जैसे ही उसकी पड़ जाती
'भैया' 'अंकल' तक सीमा अपनी रह जाती।

तब अपनी यह तोंद हृदय की पीड़ा हरती
बहन बेटी पर नारि, आह भर दिल से कहती।
इस प्रकार आचरण शुद्ध रहता अपना है
पत्नी भी खुश, कहती पति भोलू कितना है।
- प्रदीप शुक्ला
Email: [email protected]

काव्यालय को प्राप्त: 24 Jan 2018. काव्यालय पर प्रकाशित: 8 Feb 2018

***
प्रदीप शुक्ला
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 गुल्लू
 तोंद
 सत्ताईस फरवरी : शहीद का ब्याह
इस महीने :
'छिपा लेना'
राम कृष्ण "कौशल"


जब वेग पवन का बढ़ जाए
अंचल में दीप छिपा लेना।

कुछ कहते कहते रुक जाना
कुछ आंखों आंखों कह देना
कुछ सुन लेना चुपके चुपके
कुछ चुपके चुपके सह लेना

रहने देकर मन की मन में
तुम गीत प्रणय के गा लेना
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'सूर्य'
रामधारी सिंह 'दिनकर'


सूर्य, तुम्हें देखते-देखते
मैं वृद्ध हो गया।

लोग कहते हैं,
मैंने तुम्हारी किरणें पी हैं,
तुम्हारी आग को
पास बैठकर तापा है।

और अफ़वाह यह भी है
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :

'काव्यालय के आँकड़े - जुलाई 2020 से मार्च 2021'


जब विश्व भर में मानवजाति एक नए अदृश्य ख़तरे से लड़ रही थी, तब काव्यालय के जीवन में क्या हो रहा था? प्रस्तुत है काव्यालय का चौथा वार्षिक रिपोर्ट -- ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
आज नदी बिल्कुल उदास थी -- केदारनाथ अग्रवाल
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय

a  MANASKRITI  website