प्रतीक्षा
मैं और तुम
वृत्त की परिधि के
अलग अलग कोनों में
बैठे दो बिन्दु हैं,
मैनें तो अपनें
हिस्से का अर्धव्यास
पूरा कर लिया ,
क्या तुम केन्द्र पर
मुझसे मिलनें के लिये आओगी ?
- अनूप भार्गव
Anoop Bhargava
email: [email protected]
Anoop Bhargava
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अनूप भार्गव
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'गीत कोई कसमसाता'
अनीता निहलानी


नील नभ के पार कोई
मंद स्वर में गुनगुनाता,
रूह की गहराइयों में
गीत कोई कसमसाता!

निर्झरों सा कब बहेगा
संग ख़ुशबू के उड़ेगा,
जंगलों का मौन नीरव
बारिशों की धुन भरेगा!

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'सुप्रभात'
प्रभाकर शुक्ला


नयन का नयन से, नमन हो रहा है
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परत पर परत, चांदनी कट रही है
तभी तो निशा का, गमन हो रहा है
क्षितिज पर अभी भी हैं, अलसाये सपने
पलक खोल कर भी, शयन हो रहा है
..

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अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 26 जुलाई को

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