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हाइकु
मुठ्ठी में कैद
धूप फिसल गयी
लड़की हँसी
-
अनूप भार्गव
विषय:
स्त्री (18)
काव्यालय को प्राप्त: 21 Sep 2019. काव्यालय पर प्रकाशित: 8 Oct 2021
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हाइकु
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'नदी के द्वीप'
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
हम नदी के द्वीप हैं।
हम नहीं कहते कि हमको छोड़कर स्रोतस्विनी बह जाए।
वह हमें आकार देती है।
हमारे कोण, गलियाँ, अंतरीप, उभार, सैकत-कूल
सब गोलाइयाँ उसकी गढ़ी हैं।
माँ है वह! है, इसी से हम बने हैं।
किंतु हम हैं द्वीप। हम धारा नहीं हैं।
..
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'कल'
रणजीत मुरारका
कल कहाँ किसने
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जीता रहा हूँ।
आज को भूले
शंका सोच भय
से काँपता
..
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इस महीने :
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पारुल 'पंखुरी'
तीन सौ पैंसठ
सिक्के थे गुल्लक में
कुछ से मुस्कुराहटें खरीदीं
कुछ से दर्द,
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कुछ खर्चे ..
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