अप्रतिम कविताएँ
न्यूज़ चैनल
यहाँ त्रासदियाँ
प्रहसन में बदली जाती हैं,
भाषा तमाशे में
और लोग कठपुतलियों में।
तबाहियों की खुराक
इसका पेट भरती है।
बहुत मनोयोग से
किया जाता है
लाशों को
दर्शनीय बनाने का काम।

बार-बार एक कार
डूबती हुई दीखती है,
तेज़ धार पानी में
बार-बार एक लड़की
सिर झटकती है
रोती जाती है,
इतने आंसुओं के बावजूद
नहीं बनती
दुख की कोई झील।
गिरती हुई छतों
और जलती हुई झोपड़ियों से
गुज़रते हुए चलता है
कारोबार ख़बरों का।
जलती आग
यहाँ सबसे अच्छा दृश्य है,
बहता हुआ पानी भी,
ख़ास कर तब
जब उसमें कोई डूब रहा हो।

चीखती हुई औरत
बार-बार चीखती जाती है
ऐंकर मुस्कुराता हुआ बताता है
और भी ऐसे दृश्य दिखाएँगे हम
ब्रेक के बाद।
देखिएगा लाइव मर्डर
सिर्फ़ हमारे चैनल पर।
- प्रियदर्शन
प्रहसन -- skit
विषय:
समाज (33)

काव्यालय को प्राप्त: 2 Mar 2026. काव्यालय पर प्रकाशित: 10 Apr 2026

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 न्यूज़ चैनल
इस महीने :
'नफ़रत'
विस्सावा शिंबोर्स्का


देखो, तो अब भी कितनी चुस्त-दुरुस्त और पुरअसर है
हमारी सदी की नफ़रत,
किस आसानी से चूर-चूर कर देती है
बड़ी-से-बड़ी रुकावटों को!
किस फुर्ती से झपटकर
हमें दबोच लेती है!

यह दूसरे जज़्बों से कितनी अलग है --
एक साथ ही बूढ़ी भी और जवान भी।
यह खुद ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'राम की जल समाधि'
भारत भूषण


पश्चिम में ढलका सूर्य उठा वंशज सरयू की रेती से,
हारा-हारा, रीता-रीता, निःशब्द धरा, निःशब्द व्योम,
निःशब्द अधर पर रोम-रोम था टेर रहा सीता-सीता।

किसलिए रहे अब ये शरीर, ये अनाथमन किसलिए रहे,
धरती को मैं किसलिए सहूँ, धरती मुझको किसलिए सहे।
तू कहाँ खो गई वैदेही, वैदेही तू खो गई कहाँ,
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'रंग और मैं'
आशा जैसवाल


बड़े निराले होते हैं,
जीवन के ये रंग।
कभी उषा की लालिमा
बन कर मन में
आशाओं के कमल
खिला जाते हैं
तो कभी
निराशा की ... ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
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