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Soorya
soory, tumhen dekhate-dekhate
main vRddh ho gayaa.

log kahate hain,
mainne tumhaaree kiraNen pee hain,
tumhaaree aag ko
paas baiThakar taapaa hai.

aur afavaah yah bhee hai
ki main baahar se balee
aur bheetar se samRddh ho gayaa.

magar raaz kee baat kahoo(n),
to tumhen kalank lagegaa.

taakat mujhe ab tumase naheen,
andhakaar se milatee hai.
jahaa(n) tak tumhaaree kiraNen
naheen pahu(n)chateen,
us guphaa ke haahaakaar se milatee hai.
- Ramdhari Singh 'Dinkar'
दिनकर के संकलन "हारे को हरिनाम" से

काव्यालय पर प्रकाशित: 8 Nov 2021

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होलोकॉस्ट में एक कविता
~ प्रियदर्शन

लेकिन इस कंकाल सी लड़की के भीतर एक कविता बची हुई थी-- मनुष्य के विवेक पर आस्था रखने वाली एक कविता। वह देख रही थी कि अमेरिकी सैनिक वहाँ पहुँच रहे हैं। इनमें सबसे आगे कर्ट क्लाइन था। उसने उससे पूछा कि वह जर्मन या अंग्रेजी कुछ बोल सकती है? गर्डा बताती है कि वह 'ज्यू' है। कर्ट क्लाइन बताता है कि वह भी 'ज्यू' है। लेकिन उसे सबसे ज़्यादा यह बात हैरानी में डालती है कि इसके बाद गर्डा जर्मन कवि गेटे (Goethe) की कविता 'डिवाइन' की एक पंक्ति बोलती है...

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राष्ट्र वसन्त
रामदयाल पाण्डेय

पिकी पुकारती रही, पुकारते धरा-गगन;
मगर कहीं रुके नहीं वसन्त के चपल चरण।

असंख्य काँपते नयन लिये विपिन हुआ विकल;
असंख्य बाहु हैं विकल, कि प्राण हैं रहे मचल;
असंख्य कंठ खोलकर 'कुहू कुहू' पुकारती;
वियोगिनी वसन्त की...

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