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पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे।
मैं तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे।
लोग कहै मीरा भई बावरी न्यात कहै कुलनासी रे॥
विष का प्याला राणाजी भेज्या पीवत मीरा हाँसी रे।
'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर सहज मिले अविनासी रे॥
- मीराबाई

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मीराबाई
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इस महीने :
'नया वर्ष'
अज्ञात


नए वर्ष में नई पहल हो
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अनसुलझी जो रही पहेली
अब शायद उसका भी हल हो
... ..

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