श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो
श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो।
औरन सूँ खेलै धमार, म्हासूँ मुखहुँ न बोले हो॥
म्हारी गलियाँ ना फिरे वाके, आँगन डोलै हो।
म्हारी अँगुली ना छुए वाकी, बहियाँ मरोरै हो॥
म्हारो अँचरा ना छुए वाको, घूँघट खोलै हो।
'मीरा' को प्रभु साँवरो, रंग रसिया डोलै हो॥
- मीराबाई

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मीराबाई
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 घर आवो जी सजन मिठ बोला
 तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे
 पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे
 पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो
 मेरे तो गिरिधर गोपाल
 श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो
हम खड़े हो जाएँ अपनी बेड़ियों को तोड़ कर।
रोशनी की ओर चल दें तीरगी को छोड़ कर।
ख़त्म जब हो जाएंगी माज़ी की सब रुस्वाइयाँ,
खुद-बख़ुद मुड़ जाएगा यह वक़्त अगले मोड़ पर।

~ विनोद तिवारी

संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" में कविताओं के बीच बीच कई मुक्तक भी हैं, जैसे कि यह

इस महीने :
'अगर सुनो तो'
वाणी मुरारका


तारे जड़े हैं ज़िन्दगी में
अंधियारे बिछे हैं ज़िन्दगी में

और साँसों की लहर
सहला जाती है …

अगर सुनो तो

..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'किसके संग गाए थे'
मिलाप दूगड़


रात यदि श्याम नहीं आए थे
मैंने इतने गीत सुहाने किसके संग गाए थे?

गूँज रहा अब भी वंशी स्वर,
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किसने फिर ये रास मनोहर
वन में रचवाये थे?

शंका क्यों रहने दें मन में
चल कर सखि देखें मधुवन में
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
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