यूँ ही ...
तुम समन्दर का किनारा हो
मैं एक प्यासी लहर की तरह
तुम्हे चूमने के लिए उठता हूँ
तुम तो चट्टान की तरह
वैसी ही खड़ी रहती हो
मैं ही हर बार तुम्हे
बस छू के लौट जाता हूँ
- अनूप भार्गव
Anoop Bhargava
email: anoop_bhargava@yahoo.com
Anoop Bhargava
email: anoop_bhargava@yahoo.com

***
अनूप भार्गव
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 अगले खम्भे तक का सफ़र
 अस्तित्व
 प्रतीक्षा
 रिश्ते
 यूँ ही ...

इस महीने - काव्यालय की विशेष प्रस्तुति
#5 बिना मेरे कोई भी अर्थ कैसे निकल पाता तुम्हारे इतिहास का
#4 युद्ध के बाद कृष्ण पर क्या बीत रही होगी - वह सपने में देखती है
#3 तुम्हारे महान बनने में - क्या मेरा कुछ टूट कर बिखर गया है कनु!
#2 कृष्ण द्वारका चले गए हैं - और उनकी प्रिया? उसका संसार?
#1 उस दिन कृष्ण अपनी प्रिया को कितनी देर वंशी से टेरते रहे -