अप्रतिम कविताएँ पाने

ज़िंदगी की नोटबुक
बहुत चाहा फेयर रखूँ
ज़िन्दगी की नोटबुक को
लेकिन हमेशा रफ ही पाया...

कॉपी के उन आखिरी दो पन्नों की तरह
जिन पर होते हैं हिसाब अनगिन
हिसाब बिठाने की कोशिश में
लेकिन, छूटा कोई हासिल
गुणा करते हुए, भाग ही पाया
बहुत चाहा...

दशमलव लगा जोड़े सिफर जब
अंतहीन सवाल कोई आया
प्रायिकता कोई खोजी कहीं तो
शून्य उसका हासिल ही पाया
बहुत चाहा...

सजाने को जब-जब खींची लकीरें
अनचाहे निशानों से घिरती रहीं वे
घुमाया गोलाकार रेखा को जब भी
प्रश्नचिह्न जाने क्यों उभर आया
बहुत चाहा...

केंद्र से परिधि की त्रिज्या बनी तो
व्यास कोई सामने मुस्कुराया
सूत्र ढेरों रटते रहे पर
समय पर कोई काम न आया
बहुत चाहा...

सच मानो ये उलझा है बहुत
कोशिश की लाखों
जिंदगी का गणित
मगर समझ ही न आया
बहुत चाहा फेयर रखूँ
ज़िन्दगी की नोटबुक को
लेकिन, हमेशा रफ ही पाया..
- भावना सक्सैना
काव्यपाठ: भावना सक्सैना
गुणा=multiply,भाग=divide, दशमलव=decimal, सिफर=zero, प्रायिकता=probability, हासिल=carry over, केंद्र=center, परिधि=circumference, त्रिज्या=radius, व्यास=diameter, सूत्र=principle

काव्यालय को प्राप्त: 30 May 2022. काव्यालय पर प्रकाशित: 8 Jul 2022

***
सहयोग दें
विज्ञापनों के विकर्षण से मुक्त, काव्य के सौन्दर्य और सुकून का शान्तिदायक घर... काव्यालय ऐसा बना रहे, इसके लिए सहयोग दे।

₹ 500
₹ 250
अन्य राशि
भावना सक्सैना
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 ज़िंदगी की नोटबुक
 लुप्तप्राय
इस महीने :
'ओस जितनी नमी '
जया प्रसाद


एक नाप जितनी ख़लिश
ख़लती नहीं
चलती है

जैसे ओस की बूंद जितना
सीलापन
जैसे नींद के बाद वाली
हलकी सी थकन --
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
अक्षर नगरी

एक थी अक्षर नगरी सुन्दर
उसमें रहते सारे अक्षर।
एक था छोटा बच्चा अ,
उसका भाई बड़क्का आ।
अ की सखी थी छोटी इ।
उसकी बड़ी बहन थी ई।
चारों बच्चे बहुत दोस्त थे;
साथ खेलते और पढ़ते थे।

एक बार वे चारों बच्चे
एक पार्क में खेल रहे थे।
उस दिन उनके उसी पार्क
में चार नए बच्चे आये थे।

... पूरी रचना यहाँ पढ़ें

इस महीने :
'इस नश्वर संसार में'
कुंदन सिद्धार्थ


सिर्फ़ दुख नहीं जाता
सुख भी चला जाता है
यहाँ रहने कौन आया है

सिर्फ़ घृणा नहीं हारती
प्रेम भी हार जाता है

संसार में सबसे दुखभरी होती है प्रेम की हार
तब प्रेम सिर्फ़ कविताओं और कहानियों में
बचा रह जाता है

यही बचा हुआ प्रेम
हमारी आँखों में ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय
सहयोग दें

a  MANASKRITI  website