प्यार का उपहार

विनोद तिवारी

प्रस्तुत है विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे -- तोड़ दो सीमा क्षितिज की, गगन का विस्तार ले लो।

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प्यार का उपहार


यह कविता विनोद तिवारी की कविताओं का संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" से ली गई है।


काव्यालय पर प्रकाशित: 26 फरवरी 2021


विषय:
प्रेम (63)
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इस महीने :
'यह करूँगा मैं'
सुहैर हम्माद


नहीं नाचूँगा मैं
तुम्हारे युद्ध के
नगाड़ों पर। न ही दूँगा
अपनी आत्मा, न ही अपनी अस्थियाँ
तुम्हारे युद्ध के नगाड़ों को। नहीं
नाचूँगा तुम्हारी
ताल पर। मैं जानता हूँ उस ताल को।
जान नहीं है उसमें। जिस चमड़े को ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'मौन के शब्द'
ऋतु शर्मा नन्नन पाँडे


छोटे-छोटे जूते लाइन में रखे थे,
मासूम आँखों में डर चिपका था,
नाम, धर्म, उम्र — सब मिटा दिए गए,
सिर्फ़ एक चिन्ह — स्टार ऑफ़ डेविड बाकी था।

बिना शोर के ट्रेनें चली थीं,
सपनों को डिब्बों में बंद कर,
हर स्टेशन पर कोई माँ रोई थी,
और बच्चों ने

ईंटों की दीवा ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो। मेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।

देखिए शिव बहादुर सिंह भदौरिया की कविता "नदी का बहना मुझमें हो" पर विशेष प्रस्तुति
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