मेरी मम्मी कहती हैं

चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं
मैं भी वहीं से आयी हूँ
मेरी मम्मी कहती हैं।

मेरे भी जब पर उग आयें
चंदा पर मैं जाऊँगी
आसमान के पट पर मैं भी
तारे खूब सजाऊँगी
परियों की हूँ शहज़ादी मैं
मेरी मम्मी कहती हैं
चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं।

सीढ़ी डालूँगी ऊपर से
सीधे माँ की गोद तलक
झट-पट नीचे आ जाऊँगी
धीरे-धीरे सरक-सरक
याद सतायेगी जब घर की
मेरी मम्मी कहती हैं
चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं।

बादल पर मैं सैर को जाऊँ
अंतरिक्ष को छू लूँगी
तारों सी झिलमिल मुस्कानें
सबके मुख पर घोलूँगी
माँ की मैं लाड़ो रानी हूँ
मेरी मम्मी कहती हैं
चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं।
- शिखा गुप्ता
Shikha Gupta
Email : [email protected]

प्राप्त: 14 Nov 2013. प्रकाशित: 16 Nov 2018

***
शिखा गुप्ता
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 क्या हूँ मैं
 नदी समंदर होना चाहती है
 मेरी मम्मी कहती हैं
इस महीने
'प्रतीक्षा'
हरिवंशराय बच्चन


मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता?

मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीण पर बज कर,
अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर
और दिशाओं से प्रतिध्वनियाँ, जाग्रत सुधियों-सी आती हैं,
कान तुम्हारे तान कहीं से यदि सुन पाते, तब क्या होता?
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने
'क्षुद्र की महिमा'
श्यामनंदन किशोर


शुद्ध सोना क्यों बनाया, प्रभु, मुझे तुमने,
कुछ मिलावट चाहिए गलहार होने के लिए।

जो मिला तुममें भला क्या
भिन्नता का स्वाद जाने,
जो नियम में बंध गया
वह क्या भला अपवाद जाने!

जो रहा समकक्ष, करुणा की मिली कब छांह उसको
कुछ गिरावट चाहिए, उद्धार होने के लिए।
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 8 मार्च को

सूचना पाने के लिए
ईमेल दर्ज़ करें
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय

a  MANASKRITI  website