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है अलौकिकता
हमारे शंख में भी
और बाकी हैं उड़ानें
सुनो, बूढ़े पंख में भी
इन थकी
पिछली लयों पर भी
करो तुम गौर
-
कुमार रवीन्द्र
विषय:
आशा विश्वास (18)
काव्यालय को प्राप्त: 6 Jan 2017. काव्यालय पर प्रकाशित: 21 Dec 2017
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