Sorry, the page you are looking for cannot be found.

Would you like to play a game
and read a random poem instead?


Or please use the menu above to go to the home page or any of our sections.

***
इस महीने: <a href="https://kaavyaalaya.org/p/kumar-ravindra">कुमार रवीन्द्र</a> की रचनाएँ

'मित्र सहेजो'
कुमार रवीन्द्र


मित्र सहेजो
हम जंगल से धूप-छाँव लेकर आये हैं

पगडण्डी पर वे बैठी थीं पाँव पसारे
पेड़ों ने थे फगुनाहट के बोल उचारे

उन्हें याद थे
ऋषियों ने जो मंत्र सूर्यकुल के गाये हैं
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने: <a href="https://kaavyaalaya.org/p/kumar-ravindra">कुमार रवीन्द्र</a> की रचनाएँ
'तैर रहा इतिहास नदी में'
कुमार रवीन्द्र


तैर रहा है
यहाँ, बंधु, इतिहास नदी में

खँडहर कोट-कँगूरे तिरते उधर मगध के
इधर लहर लेकर आई है अक़्स अवध के
काँप रही है
उनकी बूढ़ी साँस नदी में ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 25 जनवरी को

सूचना पाने के लिए
ईमेल दर्ज़ करें
संग्रह से कोई भी कविता | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेखहमारा परिचय | सम्पर्क करें

a  MANASKRITI  website