अप्रतिम कविताएँ

अनमनी है सांझ
बहुत ही अनमनी है सांझ, कैसे तो बिताएं हम!

अचानक ही
छलक आये नयन कुछ
कह रहे, देखो,
अचानक भर उठे
स्वर, मन, हृदय
अवसाद से, देखो,

भला क्या-क्या छुपाओ तुम, भला क्या-क्या छुपाएं हम !

घनेरा सुरमई आकाश
भीतर तक
उतर आया,
किसी शरबिद्ध पंछी सा
अकिंचन मन
है घबराया,

चलो कुछ गुनगुनाओ तुम, चलो कुछ गुनगुनाएं हम !
बहुत ही अनमनी है सांझ, कैसे तो बिताएं हम !!
- अमृत खरे
अवसाद : दुख; शरबिद्ध : बाण से घायल; अकिंचन : थोड़ा सा

अमृत खरे का काव्य संकलन : मयूर पंख (गीत संग्रह)

काव्यालय को प्राप्त: 14 May 2019. काव्यालय पर प्रकाशित: 14 Feb 2020

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..

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उदार और भला;
क्योंकि यही एक चीज़ है
जो उसे अलग करती है
उन सभी जीवित प्राणियों से
जिन्हें हम जानते हैं।

स्वागत है अपनी...

..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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लेकिन इस कंकाल सी लड़की के भीतर एक कविता बची हुई थी-- मनुष्य के विवेक पर आस्था रखने वाली एक कविता। वह देख रही थी कि अमेरिकी सैनिक वहाँ पहुँच रहे हैं। इनमें सबसे आगे कर्ट क्लाइन था। उसने उससे पूछा कि वह जर्मन या अंग्रेजी कुछ बोल सकती है? गर्डा बताती है कि वह 'ज्यू' है। कर्ट क्लाइन बताता है कि वह भी 'ज्यू' है। लेकिन उसे सबसे ज़्यादा यह बात हैरानी में डालती है कि इसके बाद गर्डा जर्मन कवि गेटे (Goethe) की कविता 'डिवाइन' की एक पंक्ति बोलती है...

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