व्यथा जी उठी
अचेत की धूल में गढ़ी,
जंग से मढ़ी,
बरसों पहले की व्यथा,
मौन थी, सुप्त थी।
अपने आपको लपेटे थी।
चेतन ने उसे गाड़ा था यहाँ,
सँभाल न पा रहा था, अपने यहाँ।
उस दिन किसी ने,
अनजाने में
उसे छू लिया,
तो वह कराह उठी,
कुलबुला उठी,
मृत व्यथा
फिर जीवित हो गयी थी।
चेतन ने भी
उसके जी उठने पर
कुछ अश्रु-बूँदें
बहायी थीं।
- गीता मल्होत्रा
Geeta Malhotra
Email: [email protected]
Geeta Malhotra
Email: [email protected]

***
गीता मल्होत्रा
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 व्यथा जी उठी
 होली की शाम
लखनऊ के एक बड़े प्रकाशक की मुलाकात पाँचवी कक्षा के एक बालक से हुई -- तो क्या बातें हुईं दोनों में? वह बालक उस उम्र में कौन सी किताबें पढ़ रहा था? उसकी प्रथम प्रकाशित कविता कौन सी थी?

देखिए "बाल विनोद - लिखते पढ़ते कविता" "एक मुलाकात 'पंखुरी' के साथ" भाग 3 -- अद्भुत कविताओं के रचनाकार विनोद तिवारी बचपन में क्या पढ़ते थे, लिखते थे -- एक कवि की बालक से कवि बनने की यात्रा।

बचपन में विनोद तिवारी एक तलाश पर चल दिए। इन्द्रधनुष के उस पार जाना था। बचपन में ही एक उपन्यास में कुछ पढ़ कर उन्होंने अपना करियर चुना। बात उसी तलाश की थी।

सात-आठ साल की उम्र में कविता लिखनी भी शुरु की। उस वक्त उनके हिन्दी के अध्यापक ने जो कहा उसका असर अब तक उनकी हर कविता पर रहती है।

प्रस्तुत है वीडियो श्रृंखला एक मुलाकात 'पंखुरी' के साथ का भाग 2 : विनोद तिवारी और इन्द्रधनुष अब असली वार्तालाप शुरु हुई है, और कितनी दिलचस्प! बाल मन पर हुए प्रभाव जिसने जीवन भर की दिशा तय की।

शामली उत्तरप्रदेश में एक बहु-प्रतिभाशाली फूल की पंखुरी रहतीं है -- पारुल ’पंखुरी’। वह एक सफल कवयित्री, यूट्यूबर, गायिका हैं जो नित नए प्रयोग करती रहती हैं। काव्यालय परिवार का वह अभिन्न अंग हैं।

उन्होंने एक साक्षात्कार आयोजित किया, दो दिग्गज कवि विनोद तिवारी और अमृत खरे के साथ। काव्यालय की संस्थापिका वाणी मुरारका भी उपस्थित हैं। देखिए वीडियो श्रृंखला का पहला भाग

एक मुलाकात ’पंखुरी’ के साथ 1 - परिचय
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय

a  MANASKRITI  website