अप्रतिम कविताएँ
लेखक

ख़ाली पन्ना किसी खेत-सा
पड़ा रहता है उजाड़।
क़लम की नोक ही बनती है
कुदाल, हँसिया और हल।

हल, जो यादों को कुरेदते हुए
अतीत को खरोंचते हुए
दिलो-ओ-दिमाग़ पर
चलता रहता है लगातार।

फिर प्रेम की नमी टटोलकर
गहरी बोनी पड़ती हैं भावनाएँ,
सींचनी पड़ती है शैली कई बार,
करनी पड़ती है रखवाली अर्थों की।

तब कहीं पन्ने पर फूटती हैं मात्राएँ,
लहराती है फ़सल शब्दों की।

इस बार जब कोई किताब खोलो
तो देखना, पन्ने के किसी कोने पर
सुस्ता रहा होगा लेखक।
- आशीष क़ुरैशी ‘माहिद’
काव्यपाठ: आशीष क़ुरैशी ‘माहिद’
काव्य-संग्रह ‘ग़लत और सही के पार’ से
विषय:
सृजन (11)

काव्यालय को प्राप्त: 10 Nov 2025. काव्यालय पर प्रकाशित: 19 Jun 2026

***
सहयोग दें
विज्ञापनों के विकर्षण से मुक्त, काव्य के सुकून का शान्तिदायक घर... काव्यालय ऐसा बना रहे, इसके लिए सहयोग दे।

₹ 500
₹ 250
अन्य राशि
आशीष क़ुरैशी ‘माहिद’
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 लेखक
 सबसे ताक़तवर
इस महीने :
'सृष्टि का सार'
अंशु जौहरी


रंगों की मृगतृष्णा कहीं
डरती है कैनवस की उस सादगी से
जिसे आकृति के माध्यम की आवश्यकता नहीं
जो कुछ रचे जाने के लिये
नष्ट होने को है तैयार

स्वीकार्य है उसे मेरी,
काँपती उंगलियों की अस्थिरता
मेरे अपरिपक्व अर्थों की
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'गुनाह का गीत'
धर्मवीर भारती


अगर मैंने किसी के होंठ के पाटल कभी चूमे
अगर मैंने किसी के नैन के बादल कभी चूमे
महज इससे किसी का प्यार मुझको पाप कैसे हो?
महज इससे किसी का स्वर्ग मुझ पर शाप कैसे हो?

तुम्हारा मन अगर सींचूँ
गुलाबी तन अगर सीचूँ तरल मलयज झकोरों से!
तुम्हारा चित्र खींचूँ प्यास के रंगीन डोरों से
कली-सा तन, किरन-सा ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
सम्पर्क करें | हमारा परिचय
सहयोग दें

a  MANASKRITI  website