जब आप कुछ नहीं कर सकते
तो कर सकते हैं वो
जो सबसे ताक़तवर है
तूफ़ान का धागा
दरिया का तिनका
दूर पहाड़ पर जलता दिया
जो बुद्ध ने किया
रसूल ने किया
राम ने, नानक ने किया
जिसके बिना धर्म अधूरा है
और ईमान पूरा नहीं होता
युद्ध जीते नहीं जाते
इतिहास रचे नहीं जाते
नहीं खड़े होते खेत
नहीं निकलता पत्थर से पानी
नहीं मिलती किसी को मुक्ति
नहीं होता कोई प्रेम पूरा
जब आप कुछ नहीं कर सकते
तो कर सकते हैं सब्र
जो सबसे ताक़तवर है।
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो। मेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।