अप्रतिम कविताएँ
अनोखा रिश्ता
अरसे पहले मिले थे
दो अजनबी
एक दूसरे से --
कितने अंजान से थे
कितने डरे डरे थे।
निभेगी कि नहीं निभेगी,
तुम संग ज़िन्दगी कैसी कटेगी?
अनगिनत से सवाल थे,
हज़ारों कौतूहल थे,
फिर भी हम चल पड़े साथ साथ
ज़िन्दगी की डगर पर
लिये हाथों में हाथ।
कभी उलझे, कभी रूठ गये,
कभी प्यार में डूब गये
कुछ तुम हमें समझे,
कुछ हम तुम्हे समझे
कुछ हम बदले, कुछ तुम बदले
हौले हौले ही सही
एक डोर में बन्धे।
फिर जो चले
चलते ही गये
जैसे कभी अलग न थे
जैसे कभी अलग न होंगे।

जिन्दगी की शाम है,
उठने लगा ये सवाल है --
तुम पहले या मैं पहले?
तुम न रहे तो अकेले कैसे जिएंगे?
हम न रहे तो अकेले कैसे जीओगे?
कैसा रिश्ता है ये
पति और पत्नी का
कितना अटूट
कितना अनोखा
कितना दृढ़
कितना सच्चा
कितना मधुर।
समय के साथ
जो और बढता है
और पनपता है।
ज्यों ज्यों दूसरे सभी रिश्ते
दूर होते जाते हैं
पति पत्नी और भी करीब होते जाते हैं।
रिश्ता और मजबूत होता जाता है
वैसे ही जैसे
रात के बढ़ने पे
चांद निखरता जाता है।
- वीरेंद्र जैन 'उन्मुक्त'
विषय:
प्रेम (63)
विवाह (9)

काव्यालय को प्राप्त: 18 May 2020. काव्यालय पर प्रकाशित: 18 Dec 2020

***
सहयोग दें
विज्ञापनों के विकर्षण से मुक्त, काव्य के सुकून का शान्तिदायक घर... काव्यालय ऐसा बना रहे, इसके लिए सहयोग दे।

₹ 500
₹ 250
अन्य राशि
वीरेंद्र जैन 'उन्मुक्त'
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 अनोखा रिश्ता
 इतना अकेले?
इस महीने :
'आठ वर्ष'
जया प्रसाद


रिमझिम सावन बरसा जब
अंक तुम्हें भर लायी थी
कुछ खोयी-सी, कुछ अबूझ
कुछ खुश, कुछ घबराई थी

गोल-मटोल, चार पैर पर
घर-आँगन सब नाप लिया
नन्हे वामन जैसे तुमने
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने :
'यूंँ पति की मांँ बनते जाना'
किरण सिपानी


हर पल वीडियो दिखाकर फुसलाते जाना
और यूंँ कौरों का हलक से उतरते जाना ‌
कभी वायलिन पकड़ना, कभी झटक के रख देना
रूठना- मचलना- न नहाने की ज़िद करते रहना
कातर नजरों से मेरे हुक्म को सिर्फ तकते रहना
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो। मेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।

देखिए शिव बहादुर सिंह भदौरिया की कविता "नदी का बहना मुझमें हो" पर विशेष प्रस्तुति
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
सम्पर्क करें | हमारा परिचय
सहयोग दें

a  MANASKRITI  website