अप्रतिम कविताएँ
हे प्रियतम
हे प्रियतम
अद्भुत छवि बन
सुन्दरतम

बसे हो तुम
मन मन्दिर मे
आराध्य बन

भ्रमर जैसे
पागल बन ढूँढू
मैं पुष्पवन

तुम झरना
मैं इंद्रधनुष के
रंगीन कण

चंचलता मैं
ज्यों अल्हड़ लहर
सागर तुम

तुम विशाल
अनंत युग जैसे
मैं एक क्षण

हो तरुवर
अडिग धीर स्थिर
तो मैं पवन

जैसे ललाट
पर कोरी बिन्दिया
सजे चन्दन

हे प्रियतम....
- मानोशी चटर्जी
Manoshi Chatterjee
Email : [email protected]
Manoshi Chatterjee
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विषय:
प्रेम (63)

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भाषा तमाशे में
और लोग कठपुतलियों में।
तबाहियों की खुराक
इसका पेट भरती है।
बहुत मनोयोग से
किया जाता है
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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हारा-हारा, रीता-रीता, निःशब्द धरा, निःशब्द व्योम,
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किसलिए रहे अब ये शरीर, ये अनाथमन किसलिए रहे,
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..

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