इस महीने
'एक फूल की चाह'
सियाराम शरण गुप्त


बेटी, जाता हूँ मन्दिर में
आज्ञा यही समझ तेरी।
उसने नहीं कहा कुछ, मैं ही
बोल उठा तब धीरज धर -
तुझको देवी के प्रसाद का
एक फूल तो दूँ लाकर! ...

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 26 अक्टूबर को

सूचना पाने के लिए
ईमेल दर्ज़ करें
नई प्रकाशित कवितायें
फाल्गुनी रॉय
सूर्यकुमारी माहेश्वरी
परमहंस योगानन्द
विनीत मिश्रा
गिरिजाकुमार माथुर
प्रतिध्वनि में नया ऑडियो
फाल्गुनी रॉय
महादेवी वर्मा
धर्मवीर भारती
धर्मवीर भारती
सारी रचनाएँ काव्यालय के इन विभागों में संयोजित हैं:
20वी सदी के पूर्व हिन्दी का शिलाधार काव्य
20वी सदी के प्रारम्भ से समकालीन काव्य
उभरते कवियों की रचनाएँ
अन्य भाषाओं के काव्य से जोड़ती हुई रचनाएँ
मोती समान पंक्तियों का चयन
कविताओं का ऑडियो: कवि की अपनी आवाज़ में, या अन्य कलाकार द्वारा:
काव्य सम्बन्धित लेख:
प्रकाशन का समयक्रम:
सामान्यतः महीने का प्रथम और तीसरा शुक्रवार
on Forge