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जया प्रसाद
जया प्रसाद की काव्यालय पर रचनाएँ
अघट घटती जा रही है
आठ वर्ष

बिहार-झारखण्ड में पली बड़ी हुई जया प्रसाद स्वीडन में इंजिनियरिंग के एक क्षेत्र में पी.एच.डी कर रही हैं। कविता से उनका सम्बन्ध, उनके अपने शब्दों में कुछ इस प्रकार है --

मेरी अब तक की पढ़ाई तकनीक के क्षेत्र में रही है , तो फिर साहित्य से मेरा रिश्ता स्कूल की हिंदी अंग्रेजी किताबों और फिर तकरीबन १२ साल की उम्र में जो उपन्यास पढ़ने की आदत लगी उसी से है। अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने की वजह से औपचारिक बातचीत में स्वतः ही अंग्रेजी प्राथमिकता ले लेती है। कविताएं लिखते वक़्त बात अलग हो जाती है , उस वक़्त जो मैं होती हूँ उसका मेरी शिक्षा या मेरे व्यावहारिक अनुभवों से से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं होता। मेरी कविता वो होती है जो मैं महसूस करती हूँ शायद एक पल के सौंवे हिस्से में, पर वो भावना इतनी गहन होती है कि मेरे पूरे अस्तित्व को खुद में समाहित कर लेती है। कई बार जब मैं अपनी लिखी कविताएं बाद में पढ़ती हूँ तो मुझे लगता है कि मैं नहीं जानती उसे, जिसने ये लिखी हैं , और कई बार लगता है जैसे बेहद करीब से जानती हूँ। मुझे नहीं पता कि मेरी कविताओं का कोई अर्थ है, या वो सही मात्रा में लिखी गयीं हैं या फिर, उनमें कोई सच्चाई या वास्तविकता है या नहीं। मैं इतना जानती हूँ, कि अगर मैंने तब वो नहीं लिखा होता जब लिखना था, फिर शायद उस वक़्त कि मनःस्थिति से मैं कभी बाहर नहीं आ पाती।


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