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नृत्य
धूसर रेत के
टीले पर
चाँदनी
आई उतर
साठ कली का
घाघरा
अँगिया
एक कली भर
पीले, लाल
सुर्ख रंगों से
रंगी थी
उसकी चूनर
वाणी सुरीली
कमर लचीली
पाँव उठे जो इस गोरी के
कैसे झूमी रेत नचीली।
-
दिव्या माथुर
Divya Mathur
email:
divyamathur at aol dot com
विषय:
प्रकृति (41)
चाँद (8)
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धत्
नृत्य
इस महीने :
'रंग'
गीता दूबे
तुम्हारे पास बहुत से रंग हैं
दोस्ती, प्यार, इकरार,
उम्मीदों और खुशियों के।
सपनों का तो रंग-बिरंगा
चंदोवा ही तान दिया है तुमने।
निश्छल मुस्कान का ... ..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने :
'गले मिलते रंग'
विनोद दास
आह्लाद में डूबे रंग खिलखिला रहे हैं
इतने रंग हैं
कि फूल भी चुरा रहे हैं रंग
आज तितलियों के लिए
गले मिल रहे हैं रंग
जब मिलता है गले एक रंग
दूसरे रंग से
बदल जाता है ...
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
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