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हार्मनी
स़फेद और काला अलग रहेंगे
तो नस्ल कहाएंगे
मिलकर रहेंगे तो संगीत
हारमोनियम
साहचर्य की एक मिसाल है
उंगलियों के बीच की ख़ाली जगह
उंगलियों से भर देने के लिए है।
-
हेमंत देवलेकर
काव्यपाठ:
हेमंत देवलेकर
विषय:
समाज (33)
काव्यालय को प्राप्त: 30 Dec 2023. काव्यालय पर प्रकाशित: 26 Jul 2024
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हेमंत देवलेकर
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ
पेड़ों का अंतर्मन
हर घर एक पृथ्वी
हार्मनी
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर
टीलों पर मन्दिर हों
और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ --
मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो
।
मेरा बदन काट कर नहरें
सभी को पोषण पहुँचाएँ।
देखिए
शिव बहादुर सिंह भदौरिया
की कविता
"नदी का बहना मुझमें हो"
पर
विशेष प्रस्तुति
इस महीने :
'सृष्टि का सार'
अंशु जौहरी
रंगों की मृगतृष्णा कहीं
डरती है कैनवस की उस सादगी से
जिसे आकृति के माध्यम की आवश्यकता नहीं
जो कुछ रचे जाने के लिये
नष्ट होने को है तैयार
स्वीकार्य है उसे मेरी,
काँपती उंगलियों की अस्थिरता
मेरे अपरिपक्व अर्थों की
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'लेखक'
आशीष क़ुरैशी ‘माहिद’
ख़ाली पन्ना किसी खेत-सा
पड़ा रहता है उजाड़।
क़लम की नोक ही बनती है
कुदाल, हँसिया और हल।
हल, जो यादों को कुरेदते हुए
अतीत को खरोंचते हुए
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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