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Sampoorna Yaatraa
pyaas to tumheen bujhaaogee nadee
main to saagar hoo(n)
pyaasaa
athaah.

tum bahatee raho
mujh tak aane ko.
main tumhen loo(n)gaa nadee
sampoorN.

kahanaa tum pahaaḌ se
apane jism par jhaḌaa
sampoorN tapasvee paraag
gholataa rahe tumamen.

tum sootr naheen ho nadee n hee setu
sampoorN yaatraa ho mujh tak
jaage hue devataaon kee chetanaa ho tum.

tum sRjan ho
chaTTaanee deh kaa.
pyaas to tumhee bujhaaogee nadee.

main to saagar hoo(n)
pyaasaa
athaah
- Divik Ramesh

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होलोकॉस्ट में एक कविता
~ प्रियदर्शन

लेकिन इस कंकाल सी लड़की के भीतर एक कविता बची हुई थी-- मनुष्य के विवेक पर आस्था रखने वाली एक कविता। वह देख रही थी कि अमेरिकी सैनिक वहाँ पहुँच रहे हैं। इनमें सबसे आगे कर्ट क्लाइन था। उसने उससे पूछा कि वह जर्मन या अंग्रेजी कुछ बोल सकती है? गर्डा बताती है कि वह 'ज्यू' है। कर्ट क्लाइन बताता है कि वह भी 'ज्यू' है। लेकिन उसे सबसे ज़्यादा यह बात हैरानी में डालती है कि इसके बाद गर्डा जर्मन कवि गेटे (Goethe) की कविता 'डिवाइन' की एक पंक्ति बोलती है...

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राष्ट्र वसन्त
रामदयाल पाण्डेय

पिकी पुकारती रही, पुकारते धरा-गगन;
मगर कहीं रुके नहीं वसन्त के चपल चरण।

असंख्य काँपते नयन लिये विपिन हुआ विकल;
असंख्य बाहु हैं विकल, कि प्राण हैं रहे मचल;
असंख्य कंठ खोलकर 'कुहू कुहू' पुकारती;
वियोगिनी वसन्त की...

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