प्रकाशन के पहले, काव्यालय सम्पादन का हमारा सुखद अनुभव

वाणी मुरारका, विनोद तिवारी



आपके संग कविता साझा करने के पहले, काव्यालय पर कविता प्रकाशित करने के पहले, हम जो उस कविता के संग वक्त गुजारते हैं, उसका हमारा अनुभव कुछ ऐसा रहता है|

एक हुआ कि पत्रिका चलाने में अगला अंक निकालना है - उसमें कुछ कवितायें भी होनी चाहिए - जो सब हमें मिली हैं उनमें से जो मोटा मोटी ठीक हैं उसे छाँट लें - करीब चार पन्ने तो भर जाएँ|

और एक हुआ कि किसी कविता को चुन कर उसे अपना बनाना| काव्यालय में कविता हम ऐसे चुनते हैं| हो सकता है पाठकों को कोई एक कविता आकर्षित न करे, पर काव्यालय के लिए हम हर एक कविता जो चुनते हैं उसके साथ एक सम्बन्ध कायम हो जाता है| उसे सिर्फ चुनते ही नहीं हैं, उसे अपना बनाते हैं, उसके साथ एक रिश्ता कायम करते हैं - काव्यालय के सदस्य होने का रिश्ता| उसे चुनने और प्रकाशित करने के दौरान एहसासों की एक कड़ी कायम होती है जिसकी महक हमारे लिए उस रचना के साथ जुड़ जाती है|

कई बार कोई कविता कई महीनों तक हमारे शोर्ट लिस्ट में रहती है - हम सोचते हैं उसे काव्यालय में शामिल करें कि नहीं| वैसे ही जैसे कोई दो लोग कई महीने साल मिलते रहें, कई बार सोचें कि विवाह के बंधन में बंधना है कि नहीं|

बीच में कुछ साल ऐसे गुज़रे जब "काव्यालय में कई महीनों से कुछ प्रकाशित नहीं हुआ है" बस इस विचार से कई रचनाएँ शामिल हो गयीं - लगभग 2005 से 2007 के बीच में| आज वह रचनाएँ कुछ अजनबी से लगते हैं| उन्हें देखने पर मन सवाल करता है, "कौन है यह?"

ऐसा नहीं कि वह सारे "ग़लत" चुने गए हैं| कई आज पुनः नए सिरे से मिलें तो भी उन्हें काव्यालय में शामिल करना चाहेंगे| मगर उन वर्षों में अन्य व्यस्तताओं के बीच में उन रचनाओं को प्रकाशित करने के दौरान उनके संग पूरा रिश्ता कायम नहीं किया, उन्हें पूरी तरह से अपनाया नहीं|

आजकल फिर से हम नियमित रूप से आपके साथ काव्य का आनन्द बाँट रहे हैं| ऐसे में जो भी प्रकाशित होता है उसके साथ वह रिश्ता कायम होता है जो काव्यालय में कुछ प्रकाशित करने के अनुभव का ख़ास हिस्सा है| इस बात की हमें संतुष्टि है|

हर चयन के विषय में कितनी बार हमारे बीच चर्चा होती है| वह विचारों का आदान प्रदान भी उन रचनाओं में छिप जाता है - जिनकी महक सिर्फ हमें आती है| रचना का ऑडियो बनाने में, उसके लिए भूमिका लिखने में रचना के साथ और वक्त गुज़रता है, रचना के विषय में और चर्चा होती है - रचना के संग सम्बन्ध और गहरा हो जाता है|

काव्यालय के सम्पादन में यह अनुभव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है| इसीलिए हम कम ही रचनाएँ चुनते हैं, प्रकाशित करते हैं| कविता से प्रेम करना हो तो जैसा कि पामेला स्पाईरो वैगनर ने कहा है "एक दिन में एक ही कविता पढ़ो"|

और हमारे लिए अंतिम आनन्द जब कवि की उस सौन्दर्य सृजन को हम आपके संग बाँटते हैं! रचनाओं के विषय में हम अपने कुछ विचार, भावनाएं जो आपको ईमेल में लिखते हैं, लगता है एक गीतों की पाती भेज रहे हैं!

4 नवम्बर 2016


Topic:
Editorial (9)
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