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मौन के शब्द
छोटे-छोटे जूते लाइन में रखे थे,
मासूम आँखों में डर चिपका था,
नाम, धर्म, उम्र — सब मिटा दिए गए,
सिर्फ़ एक चिन्ह — स्टार ऑफ़ डेविड बाकी था।

बिना शोर के ट्रेनें चली थीं,
सपनों को डिब्बों में बंद कर,
हर स्टेशन पर कोई माँ रोई थी,
और बच्चों ने आँसू पीकर उत्तर दिया — “ठीक हूँ, माँ।”

ईंटों की दीवारें, कोनों की छाँव,
अंधेरे तहख़ानों में साँसे सिकुड़ी थीं,
जहाँ जीवन की खुराक एक रोटी थी,
और उम्मीद — एक खिड़की की दरार।

कैम्पों की राख से उड़ती हवाएँ,
आज भी उस गंध को ढोती हैं,
जहाँ एक नंबर बन गया नाम,
और इंसान — एक आँकड़ा मात्र।

पर वे ख़त्म नहीं हुए…
हर यहूदी आँख में अब इतिहास जलता है,
हर प्रार्थना में उनकी चीख़ें गूँजती हैं,
और हर मेनोराह की लौ कहती है —
“हम बचे हैं, ताकि तुम भूलो नहीं।”
"याद रखो — ताकि फिर कभी न हो।"
- ऋतु शर्मा नन्नन पाँडे
मेनोराह - यहूदी पूजन में प्रयोग होने वाला 7-9 मोमबत्तियों का स्टैंड
Topic:
Torture Terror (8)

काव्यालय को प्राप्त: 30 Jun 2026. काव्यालय पर प्रकाशित: 11 Sep 2026

***
This Month :
'Yah Karoongaa Main'
Suheir Hammad


naheen naachoo(n)gaa main
tumhaare yuddh ke
nagaaḌon par. n hee doo(n)gaa
apanee aatmaa, n hee apanee asthiyaa(n)
tumhaare yuddh ke nagaaḌon ko. naheen
naachoo(n)gaa tumhaaree
taal par. main jaanataa hoo(n) us taal ko.
jaan naheen hai usamen. jis chamaḌe ko
..

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This Month :
'Thaharaav'
Rahul Singh 'Rahu'



aao ham n sochen kuchh,
n khojen kuchh,
bas yoo(n) hee dekhen sab kuchh,
itmeenaan se...
jiyen is pal ke gumaan se,
jo rok rahaa hamen,
kaun saa yah bhram hai?

..

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मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो। मेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।

देखिए शिव बहादुर सिंह भदौरिया की कविता "नदी का बहना मुझमें हो" पर विशेष प्रस्तुति
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