This Month
काव्यालय की विशेष प्रस्तुति
किसी के सान्निध्य का ऐसा असर!
'तुम्हारे साथ रहकर'
सर्वेश्वरदयाल सकसेना


तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है
कि दिशाएँ पास आ गयी हैं,
हर रास्ता छोटा हो गया है,
दुनिया सिमटकर
एक आँगन-सी बन गयी है ...
पूरी रचना यहाँ पढें और सुनें...
दाम्पत्य जीवन में अहं के टकरार के बाद -
'पुनर्मिलन'
राजेश कुमार दूबे


फिर तुम्हारे अंक में नव प्रीत के दो पल बिता लूँ
इस बहाने दंभ के उस आवरण को भी हटा लूँ

दंश दे जो जिंदगी को वह कहानी हम भुला दें
आपसी मनभेद की अंतर्व्यथा को हम सुला दें
नेह के नवपुष्प का नव अंकुरण फिर से करा लूँ
फिर तुम्हारे अंक में नव प्रीत के दो पल बिता लूँ ...
पूरी रचना यहाँ पढें...
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