उदासी खूबसूरत
अम्बुधि लहरों के शोर में
असीम शान्ति की अनुभूति लिए,
अपनी लालिमा के ज़ोर से
अम्बर के साथ – लाल सागर को किए,
विहगों के होड़ को
घर लौट जाने का संदेसा दिए,
दिनभर की भाग दौड़ को
संध्या में थक जाने के लिए
दूर क्षितिज के मोड़ पे
सूरज को डूब जाते देखा!

तब, तट पे बैठे
इस दृश्य को देखते
नम आँखें लिए
बाजुओं को आजानुओं से टेकते
इस व्याकुल मन में
एक विचार आया!
किंतु उस उलझन का,
परामर्श आज भी नही पाया!
की जब विदाई में एक दुल्हन रोती है,
जब बिन बरखा-दिन में धुप खोती है,
जब शाम अंधेरे में सोती है,
तब, क्या उदासी खुबसूरत नही होती है?
- दीपक कुमार
अम्बुधि : सागर । आजानु : घुटना
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इस महीने :
'समय बना है यादों से'
सुमन शुक्ला


आज हुआ मन को विश्वास
समय बना है यादों से
यादें बनती भूल भूल कर
तुम क्या इस को स्वीकारोगे?
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इस महीने :
'कैसा परिवर्तन'
आभा सक्सेना


प्रकृति मौन हो देख रही है
आज समय का परिवर्तन
मृत्यु खेलती है आंगन में
करती है भीषण नर्तन।

झंझावातों में मनुष्य का
साहस संबल टूट गया
भूल गया सब खेल अनोखे
भूल गया पूजा अर्चन।
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इस महीने :

'अभिभूत करतीं दिव्य-भव्य कवितायें : समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न'
अमृत खरे


विशिष्ट गीत कवि अमृत खरे की "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" पर पुस्तक समीक्षा

कविता संग्रह शूरु से अन्त तक पढ़ा, गुना, अनुभव किया और जिया| उसमें डूबा| मैं मैं न रहा| स्वयं कवि विनोद तिवारी हो गया| परकाया प्रवेश हो गया| यह निश्चित ही कवि और कविता की "सिद्धि" को सिद्ध करता है|

काव्य-संग्रह में अग्रज डॉ. तिवारी की कविता के अनेक रंग... ..

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इस महीने :

'समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न'
विनोद तिवारी


विनोद तिवारी की कविताओं का संकलन
काव्यालय का पुस्तक प्रकाशन
वाणी मुरारका की चित्रकला के संगे
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