तेरी हँसी कृष्ण विवर सी
हमारे ब्रह्माण्ड में कृष्ण विवर नामक अत्यंत सघन पिंड हैं जिन्हें अंग्रेजी में black hole कहते हैं। इनका गुरुत्वाकर्षण इतना सशक्त होता है कि उनमें सब कुछ अपने में समा लेने की और सब कुछ ग्रहण कर लेने की क्षमता होती है। यह कविता इसी प्रतीक पर आधारित है।

छोटी सी दुनिया
कितने सारे लोग
रज तम सत का
विभिन्न संयोग।
सहूलियत के हिसाब से
बाँट लिया,
कितने नामों से
पुकार लिया,
मान्यताओं और परम्पराओं में
जकड़ लिया।
किसी ने कहा-
तू है
किसी ने कहा-
तू नहीं है
किसी ने मौन साध लिया।
कोई कहता-
तू एक है
कोई कहता-
तू अनेक है
किसी ने माना–
तेरा रूप है
किसी ने माना-
तू अरूप है
सदियों से बहस होती रही
बहस जंग में तब्दील हुई
तलवारें खिंच गई
बंदूकें तन गई
और तू
हँसता रहा

तेरी हँसी-
कृष्ण विवर सी
ज्ञान-अज्ञान
सूक्ष्म-स्थूल
प्रेम-घृणा
स्वाद-अस्वाद
मान-अपमान
जन्म-मृत्यु
कण-कण
हर क्षण
समाता रहा
समाता रहा
और तू
हँसता रहा
हँसता रहा
हँसता रहा
- पूनम सिन्हा

काव्यालय पर प्रकाशित: 27 Dec 2016

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इस महीने :
'छिपा लेना'
राम कृष्ण "कौशल"


जब वेग पवन का बढ़ जाए
अंचल में दीप छिपा लेना।

कुछ कहते कहते रुक जाना
कुछ आंखों आंखों कह देना
कुछ सुन लेना चुपके चुपके
कुछ चुपके चुपके सह लेना

रहने देकर मन की मन में
तुम गीत प्रणय के गा लेना
..

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इस महीने :
'सूर्य'
रामधारी सिंह 'दिनकर'


सूर्य, तुम्हें देखते-देखते
मैं वृद्ध हो गया।

लोग कहते हैं,
मैंने तुम्हारी किरणें पी हैं,
तुम्हारी आग को
पास बैठकर तापा है।

और अफ़वाह यह भी है
..

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इस महीने :

'काव्यालय के आँकड़े - जुलाई 2020 से मार्च 2021'


जब विश्व भर में मानवजाति एक नए अदृश्य ख़तरे से लड़ रही थी, तब काव्यालय के जीवन में क्या हो रहा था? प्रस्तुत है काव्यालय का चौथा वार्षिक रिपोर्ट -- ..

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आज नदी बिल्कुल उदास थी -- केदारनाथ अग्रवाल
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