अप्रतिम कविताएँ
किसके संग गाए थे
रात यदि श्याम नहीं आए थे
मैंने इतने गीत सुहाने किसके संग गाए थे?

गूँज रहा अब भी वंशी स्वर,
मुख-सम्मुख उड़ता पीताम्बर।
किसने फिर ये रास मनोहर
वन में रचवाये थे?

शंका क्यों रहने दें मन में
चल कर सखि देखें मधुवन में
पथ के काटों ने क्षण-क्षण में
आँचल उलझाए थे।

मुझे याद है हरि ने छिप कर
मुग्ध दृष्टि डाली थी मुझ पर
क्यों अंगों में सिहर रही भर
भेंट न यदि पाये थे।
- मिलाप दूगड़
विषय:
भक्ति और प्रार्थना (31)
कृष्ण (18)

काव्यालय पर प्रकाशित: 9 Apr 2021

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हारा-हारा, रीता-रीता, निःशब्द धरा, निःशब्द व्योम,
निःशब्द अधर पर रोम-रोम था टेर रहा सीता-सीता।

किसलिए रहे अब ये शरीर, ये अनाथमन किसलिए रहे,
धरती को मैं किसलिए सहूँ, धरती मुझको किसलिए सहे।
तू कहाँ खो गई वैदेही, वैदेही तू खो गई कहाँ,
..

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