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चाँद के साथ-साथ
पेड़ों के झुरमुट से
झाँकता
चाँद पूनम का
बिल्डिंगों की ओट में
चलता है साथ-साथ
भर रास्ते
पहुँचा के घर
सुस्ताता है
टँग जाता है
बाहर खिड़की के
आसमान में
हौले से
खिसक लेता है
बत्तियों के
गुल होने
और
नींद के पसर जाने के बाद
जैसे
किसी बच्चे को
थपकी दे-दे
सुला देना
और
बना कर तकियों की बाड़
हौले से
उठ जाना
करने को
छूटे काम
-
चेतन कश्यप
काव्यपाठ:
नूपुर अशोक
विषय:
चाँद (8)
काव्यालय को प्राप्त: 20 May 2025. काव्यालय पर प्रकाशित: 5 Dec 2025
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'रंग'
गीता दूबे
तुम्हारे पास बहुत से रंग हैं
दोस्ती, प्यार, इकरार,
उम्मीदों और खुशियों के।
सपनों का तो रंग-बिरंगा
चंदोवा ही तान दिया है तुमने।
निश्छल मुस्कान का ... ..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने :
'गले मिलते रंग'
विनोद दास
आह्लाद में डूबे रंग खिलखिला रहे हैं
इतने रंग हैं
कि फूल भी चुरा रहे हैं रंग
आज तितलियों के लिए
गले मिल रहे हैं रंग
जब मिलता है गले एक रंग
दूसरे रंग से
बदल जाता है ...
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
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