अप्रतिम कविताएँ
स्थगित सपना

हिन्दी अनुवाद


स्थगित सपने का क्या होता है?

क्या वह सूख जाता है
किशमिश जैसे धूप में?
या पकता है घाव सा
फिर रिसता है?
बासता है, जैसे सड़ता गोश्त?
या पपड़ी जम जाती है
चीनी अलग हो जाती है
जैसे चाशनी पर?

शायद वह बस लच जाता है
जैसे भारी बोझ।

या कि होता है विस्फोट?


अंग्रेज़ी मूल


What happens to a dream deferred?

Does it dry up
like a raisin in the sun?
Or fester like a sore—
And then run?
Does it stink like rotten meat?
Or crust and sugar over—
like a syrupy sweet?

Maybe it just sags
like a heavy load.

Or does it explode?


- लैंग्स्टन ह्यूज़
- अनुवाद : वाणी मुरारका
विषय:
उदासी (19)

काव्यालय को प्राप्त: 1 Jan 1901. काव्यालय पर प्रकाशित: 21 Aug 2020

***
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें होमेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।

देखिए शिव बहादुर सिंह भदौरिया की कविता "नदी का बहना मुझमें हो" पर विशेष प्रस्तुति
इस महीने :
'सृष्टि का सार'
अंशु जौहरी


रंगों की मृगतृष्णा कहीं
डरती है कैनवस की उस सादगी से
जिसे आकृति के माध्यम की आवश्यकता नहीं
जो कुछ रचे जाने के लिये
नष्ट होने को है तैयार

स्वीकार्य है उसे मेरी,
काँपती उंगलियों की अस्थिरता
मेरे अपरिपक्व अर्थों की
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :

'लेखक'
आशीष क़ुरैशी ‘माहिद’


ख़ाली पन्ना किसी खेत-सा
पड़ा रहता है उजाड़।
क़लम की नोक ही बनती है
कुदाल, हँसिया और हल।

हल, जो यादों को कुरेदते हुए
अतीत को खरोंचते हुए

..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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