अप्रतिम कविताएँ पाने
किसके संग गाए थे
रात यदि श्याम नहीं आए थे
मैंने इतने गीत सुहाने किसके संग गाए थे?

गूँज रहा अब भी वंशी स्वर,
मुख-सम्मुख उड़ता पीताम्बर।
किसने फिर ये रास मनोहर
वन में रचवाये थे?

शंका क्यों रहने दें मन में
चल कर सखि देखें मधुवन में
पथ के काटों ने क्षण-क्षण में
आँचल उलझाए थे।

मुझे याद है हरि ने छिप कर
मुग्ध दृष्टि डाली थी मुझ पर
क्यों अंगों में सिहर रही भर
भेंट न यदि पाये थे।
- मिलाप दूगड़

काव्यालय पर प्रकाशित: 9 Apr 2021

***
इस महीने :
'नया वर्ष'
अज्ञात


नए वर्ष में नई पहल हो
कठिन ज़िंदगी और सरल हो
अनसुलझी जो रही पहेली
अब शायद उसका भी हल हो
... ..

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