
10 अक्तूबर 1955 को कमोली, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में जन्मे विनोद दास एक संवेदनशील कवि होने के साथ-साथ एक प्रखर आलोचक और वरिष्ठ पत्रकार भी रहे हैं। उनकी रचनाओं में मनुष्य की जिजीविषा, संघर्ष और आधुनिक जीवन की विडंबनाओं का बहुत ही सजीव चित्रण मिलता है। एक आलोचक के तौर पर उन्होंने समकालीन साहित्य की प्रवृत्तियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया है। उनकी दृष्टि केवल पाठ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह साहित्य को उसके सामाजिक और राजनैतिक संदर्भों में रखकर देखती है।
विनोद दास ने कविता के साथ-साथ आलोचना और गद्य की अन्य विधाओं में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं :-
कविता संग्रह :
खिलाफ हवा से गुजरते हुए
वर्णमाला से बाहर
कुजात
पतझड़ में प्रेम
आलोचना :
कविता का वैभव (काव्य आलोचना)
सृजन का आलोक (गद्य आलोचना)
भारतीय सिनेमा का अंतःकरण (सिनेमा पर महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कार्य)
अन्य विधाएँ :
सुखी घर सोसाइटी (उपन्यास)
बीच धार में (कहानी संग्रह)
छवि से अलग (संस्मरण)
बतरस (साक्षात्कारों का संग्रह)
साक्षरता और समाज (वैचारिक पुस्तक)
साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है:-
भारतीय ज्ञानपीठ का युवा लेखन पुरस्कार: कविता के क्षेत्र में उनके शुरुआती योगदान के लिए।
केदार सम्मान (केदारनाथ अग्रवाल पुरस्कार): समकालीन कविता में विशिष्ट पहचान के लिए।
श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार: उनकी काव्य संवेदना और शिल्प के लिए।
शमशेर बहादुर सिंह सम्मान: उनकी प्रखर साहित्यिक दृष्टि के सम्मान में।
विशेष: उनकी कविताओं का चयन 'The World on a Handcart' नाम से अंग्रेजी में भी अनूदित और प्रकाशित हो चुका है।