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सुदर्शन शर्मा
सुदर्शन शर्मा की काव्यालय पर रचनाएँ
नित्या
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सुदर्शन शर्मा मूल रूप से पंजाब के मुक्तसर ज़िले के पिंड मलौट से हैं।वर्तमान में श्रीगंगानगर और संगरिया(जिला हनुमान गढ़), राजस्थान में निवास है। अंग्रेज़ी साहित्य और दर्शन शास्त्र में स्नातक एवं अंग्रेज़ी, हिंदी और शिक्षा में से स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण की है।। पेशे से और हृदय से अध्यापक हैं।

पंजाबी साहित्य से विशेष लगाव और पाँच दरियाओं के पानी के असर के सदके छठी सातवीं कक्षा से अमृता प्रीतम, शिव कुमार बटालवी, करतार सिंह दुग्गल के साथ साथ वारिस शाह,बाबा बुल्ले शाह, शाह हुसैन, सुल्तान बाहू को पढ़ना शुरू कर दिया था। कम्यूनिज़्म का गहरा असर रहा ।अधिकांश मूल्य वहीं से ग्रहण किए। गोर्की, दोस्तोवस्की, टाॅलस्टाॅय सभी को खूब पढा। 'सुनेहड़े','लूणा', 'अपराध और दंड' और 'कामायनी' पसंदीदा पुस्तके है। हिंदी में रांगेय राघव, निर्मल वर्मा, जयशंकर प्रसाद, आचार्य चतुरसेन ने लुभाया।

लिखना स्कूल काॅलेज के मैगज़ीन के लिए शुरू किया। सुदर्शन मुख्य रूप से छन्द-मुक्त कविता लिखती हैं जिनमें अक्सर एक सशक्त चित्र गढ़ती हैं, जो अधसोए अधजगे जगत का सा लगता है| घोर अंतर्मुखी और संकोची हैं, लिहाज़ा पंजाबी के एकाध रिसाले, कुछ मित्रों के ब्लाॅग और काव्यालय के अतिरिक्त कहीं कुछ प्रकाशित नहीं हुआ है।

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