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बबीता माँधणा
बबीता माँधणा की काव्यालय पर रचनाएँ


बबीता माँधणा के काव्य-लेख
इतिहास खुद को दोहराएगा
लेखिका सुश्री बबीता माँधणा कोलकाता में पली बढ़ी है| पिछले २५ सालों से विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में हिंदी अध्यापन का कार्य किया, जिनमें से प्रमुख हैं- फॉउण्डेशन्स, डिवाइन मर्सी स्कूल, उषा मार्टिन स्कूल इत्यादि|



वर्तमान में हावड़ा के एक एनजीओ 'ब्रेव हर्ट्स' के बच्चों को निःशुल्क हिंदी पढ़ा रही हैं| इसी के संग कुछ गैर सरकारी संस्थाओं से भी जुडी हुई हैं जैसे कि वर्तमान में "साहित्यिकी" संस्था की सदस्या हैं और वहाँ की रचनात्मक कार्यविधियों में सक्रिय हैं|



"खुशी के मोती", बबीता माँधणा की पहली प्रकाशित पुस्तक हैं, जिसके लिए उनको 'बसंतीबाई एल. चांडक माहेश्वरी महिला साहित्य पुरस्कार-२०१९' से सम्मानित किया गया| इस पुस्तक में कहानियों और रेखाचित्रों के माध्यम से मनोरंजन और नैतिकता का संदेश संप्रेषित करने का प्रयास किया गया है| इसके अतिरिक्त वे कविताएँ व लेख भी लिखती हैं, जो समय-समय पर विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होती है|


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