अध्ययन, अध्यापन, साहित्य, और अध्यात्म -- यह आशा जायसवाल के व्यक्तित्व और रुचि का सार है। इनका बचपन राँची में बीता। बचपन से ही इन्हें साहित्य और प्रकृति से प्रेम रहा। कम उम्र में विवाह उपरान्त वे कलकत्ता आईं और अपने निजी अध्ययन के आधार पर हिन्दी साहित्य में एम. ए. किया। वे 20-25 वर्षों तक विद्यालय में अध्यापिका रहीं। गत 25 वर्षों से वे चिन्मय मिशन से जुड़ी हैं और कलकत्ता की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था "साहित्यिकी" की वरिष्ठ सदस्या हैं।