कर्म
कर्म दैविक सम्पदा का द्वार है;
विश्व के उत्कर्ष का आधार है।

कर्म पूजा, साधना का धाम है;
कर्मयोगी को कहाँ विश्राम है।

कर्म भावी योजना का न्यास है;
सत्य-चित-आनन्द का अभ्यास है।

कर्म जीवन का मधुरतम काव्य है;
कर्म से ही मुक्ति भी सम्भाव्य है।
- किरीटचन्द्र जोशी
Ref: Navneet Hindi Digest, May 1999
Poet's Address: B 12 Shivam Complex Lanka, Varanasi 221005

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इस महीने
'एक फूल की चाह'
सियाराम शरण गुप्त


बेटी, जाता हूँ मन्दिर में
आज्ञा यही समझ तेरी।
उसने नहीं कहा कुछ, मैं ही
बोल उठा तब धीरज धर -
तुझको देवी के प्रसाद का
एक फूल तो दूँ लाकर! ..

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शुक्रवार 26 अक्टूबर को

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