कर्म
कर्म दैविक सम्पदा का द्वार है;
विश्व के उत्कर्ष का आधार है।

कर्म पूजा, साधना का धाम है;
कर्मयोगी को कहाँ विश्राम है।

कर्म भावी योजना का न्यास है;
सत्य-चित-आनन्द का अभ्यास है।

कर्म जीवन का मधुरतम काव्य है;
कर्म से ही मुक्ति भी सम्भाव्य है।
- किरीटचन्द्र जोशी
Ref: Navneet Hindi Digest, May 1999
Poet's Address: B 12 Shivam Complex Lanka, Varanasi 221005

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इस महीने
'गीत कोई कसमसाता'
अनीता निहलानी


नील नभ के पार कोई
मंद स्वर में गुनगुनाता,
रूह की गहराइयों में
गीत कोई कसमसाता!

निर्झरों सा कब बहेगा
संग ख़ुशबू के उड़ेगा,
जंगलों का मौन नीरव
बारिशों की धुन भरेगा!

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इस महीने
'सुप्रभात'
प्रभाकर शुक्ला


नयन का नयन से, नमन हो रहा है
लो उषा का आगमन हो रहा है
परत पर परत, चांदनी कट रही है
तभी तो निशा का, गमन हो रहा है
क्षितिज पर अभी भी हैं, अलसाये सपने
पलक खोल कर भी, शयन हो रहा है
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अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 26 जुलाई को

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