अप्रतिम कविताएँ
कहो कैसे हो
                       लौट रहा हूँ मैं अतीत से
                       देखूँ प्रथम तुम्हारे तेवर
                       मेरे समय! कहो कैसे हो?

शोर-शराबा चीख़-पुकारें सड़कें भीड़ दुकानें होटल
सब सामान बहुत है लेकिन गायक दर्द नहीं है केवल
                       लौट रहा हूँ मैं अगेय से
                       सोचा तुम से मिलता जाऊँ
                       मेरे गीत! कहो कैसे हो?
भवन और भवनों के जंगल चढ़ते और उतरते ज़ीने
यहाँ आदमी कहाँ मिलेगा सिर्फ़ मशीनें और मशीनें
                       लौट रहा हूँ मैं यथार्थ से
                       मन हो आया तुम्हें भेंट लूँ
                       मेरे स्वप्न! कहो कैसे हो?
नस्ल मनुज की चली मिटाती यह लावे की एक नदी है
युद्धों का आतंक न पूछो ख़बरदार बीसवीं सदी है
                       लौट रहा हूँ मैं विदेश से
                       सब से पहले कुशल पूँछ लूँ
                       मेरे देश! कहो कैसे हो?
यह सभ्यता नुमाइश जैसे लोग नहीं हैं सिर्फ़ मुखौटे
ठीक मनुष्य नहीं है कोई कद से ऊँचे मन से छोटे
                       लौट रहा हुँ मैं जंगल से
                       सोचा तुम्हे देखता जाऊँ
                       मेरे मनुज! कहो कैसे हो?
जीवन की इन रफ़्तारों को अब भी बाँधे कच्चा धागा
सुबह गया घर शाम न लौटे उस से बढ़ कर कौन अभागा
                       लौट रहा हूँ मैं बिछोह से
                       पहले तुम्हें बाँह में भर लूँ
                       मेरे प्यार! कहो कैसे हो?

- चन्द्रसेन विराट
Ref: Naya Prateek, September,1976
विषय:
बीता समय (18)

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रिमझिम सावन बरसा जब
अंक तुम्हें भर लायी थी
कुछ खोयी-सी, कुछ अबूझ
कुछ खुश, कुछ घबराई थी

गोल-मटोल, चार पैर पर
घर-आँगन सब नाप लिया
नन्हे वामन जैसे तुमने
..

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और यूंँ कौरों का हलक से उतरते जाना ‌
कभी वायलिन पकड़ना, कभी झटक के रख देना
रूठना- मचलना- न नहाने की ज़िद करते रहना
कातर नजरों से मेरे हुक्म को सिर्फ तकते रहना
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो। मेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।

देखिए शिव बहादुर सिंह भदौरिया की कविता "नदी का बहना मुझमें हो" पर विशेष प्रस्तुति
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