स्वप्न के गलियारे में
हैं सत्य ये नयन जब
होगा स्वप्न अस्तित्व भी
स्वप्न के गलियारे में
उन्नत आकाश होता है

ऊसर धरा में अंकुर जैसे
दमक चमक जाते हैं ये
स्वप्न के गलियारे में
कितना उल्लास होता है

अचानक उड़ जाते हैं पखेरू
मेरी सामर्थ्य से कहीं दूर
स्वप्न के गलियारे में
निरर्थक प्रयास होता है

होगे यें भी सत्य ही
तुम्हारे कहे शब्द कदाचित
स्वप्न के गलियारे में
मरीचिका आभास होता है

ना जाने कैसे क्यूँ
ये भूल गया था मैं
स्वप्न के गलियारे में
घोर कुहास होता है

परंतु आज नवस्वप्न लेकर
मैं फिर निकल पड़ा हूँ
स्वप्न के गलियारे में
जहां मंद प्रकाश होता है
- विकास अग्रवाल
Vikas Agarwal
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Vikas Agarwal
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आज नदी बिल्कुल उदास थी -- केदारनाथ अग्रवाल
इस महीने :
'धत्'
दिव्या माथुर


सीधा
मेरी आँखों में
बेधड़क घूरती
बिल्ली सा
वह एक
निडर ख़्याल तेरा
टाँगों के बीच
पूँछ दबा
मेरी एक धत् से
भाग लिया।
..

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इस महीने :
'हाइकु'
अनूप भार्गव


मुठ्ठी में कैद
धूप फिसल गयी
लड़की हँसी ..

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इस महीने :
'बूँदें'
कुसुम जैन


बरसती हैं बूँदें
झूमते हैं पत्ते

पत्ता-पत्ता जी रहा है
पल पल को

आने वाले कल से बेख़बर
..

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