हैप्पी बड्डे गाँधी ब्रो
कोई कहता ऐसे हो
कोई कहता वैसे हो
ये सब छोड़ो और बताओ
स्वर्गलोक में कैसे हो
"सब जन एक बराबर" सुनकर
भारत का दिल ऊब गया है
सत्य,अहिंसा वाला बिस्किट
गरम चाय में डूब गया है
जहाँ-जहाँ तुम रहते,उजड़े
वे सब अड्डे गाँधी ब्रो।
दो का दूना पाँच रहे हैं
अनपढ़ कॉपी जाँच रहे हैं
जिनने तुम को पढ़ा नहीं है
तुमको गाली बाँच रहे हैं
ख़ुद कर के ख़ुद झेल रहे हैं
इक-दूजे को पेल रहे हैं
डूड तुम्हारे तीनों बंदर
छुपम-छुपाई खेल रहे हैं
दिन भर ज्ञान बाँटते रहते
महा कुबड्डे, गाँधी ब्रो।
हैप्पी बड्डे गाँधी ब्रो।
बड्डे: birthday, जन्मदिवस; ब्रो: bro, दोस्त, यार; डूड: dude, लड़के या पुरुष के लिए अनौपचारिक सम्बोधन
काव्यालय को प्राप्त: 13 Aug 2022.
काव्यालय पर प्रकाशित: 30 Sep 2022
इस महीने :
'तोंद'
प्रदीप शुक्ला
कहते हैं सब लोग तोंद एक रोग बड़ा है
तोंद घटाएँ सभी चलन यह खूब चला है।
पर मानो यदि बात तोंद क्यों करनी कम है
सुख शान्ति सम्मान दायिनी तोंद में दम है।
औरों की क्या कहूं, मैं अपनी बात बताता
बचपन से ही रहा तोंद से सुखमय नाता।
जिससे भी की बात, अदब आँखों में पाया
नाम न लें गुरु, यार, मैं पंडित 'जी' कहलाया।
आज भी ऑफिस तक में तोंद से मान है मिलता
कितना भी हो बॉस शीर्ष, शुक्ला 'जी' कहता।
मान का यह
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