गा रही मैं गीत में तूफ़ान!
गा रही मैं गीत में तूफ़ान!

आज जबकि सप्त सागर खौलते हैं
आज जबकि प्रलय के स्वर गूंजते हैं
आज घिरता आ रहा जब विश्व का अवसान
गा रही मैं गीत में तूफ़ान!

गीत मेरा सृष्टि का संहार रोके
झेल झंझावात सारे ध्वंस पारावार रोके
खण्डरों पर मैं करूँ नव विश्व का निर्माण
गा रही मैं गीत में तूफ़ान!

जो कि कर दे युवतियों में आग पैदा
वीरता के भाव पैदा औ’ प्रबल उत्साह पैदा
मैं शवों, जड़ पत्थरों में फूँक दूँगी प्राण
गा रही मैं गीत में तूफ़ान!
- सूर्यकुमारी माहेश्वरी

प्राप्त: 1 Jul 2018. प्रकाशित: 16 Aug 2018

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इस महीने
'एक फूल की चाह'
सियाराम शरण गुप्त


बेटी, जाता हूँ मन्दिर में
आज्ञा यही समझ तेरी।
उसने नहीं कहा कुछ, मैं ही
बोल उठा तब धीरज धर -
तुझको देवी के प्रसाद का
एक फूल तो दूँ लाकर! ..

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शुक्रवार 26 अक्टूबर को

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